भूमध्य सागर की लहरों पर तनाव कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब इजरायली नौसेना ने गाजा की ओर बढ़ रहे 50 जहाजों के एक विशाल बेड़े को बीच रास्ते में रोका, तो ये खबर पूरी दुनिया में आग की तरह फैल गई। ये केवल एक सैन्य ऑपरेशन नहीं था। ये एक सीधा संदेश था। इजरायल ने साफ कर दिया कि उसकी समुद्री सीमा और सुरक्षा घेरे को चुनौती देना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। इस कार्रवाई में दो विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी पेचीदा बना दिया है।
आपको समझना होगा कि ये कोई अचानक हुई भिड़ंत नहीं थी। ये हफ्तों की निगरानी और खुफिया जानकारी का नतीजा था। इजरायल के डिफेंस फोर्सेस (IDF) को शक था कि मानवीय सहायता के नाम पर इन जहाजों के जरिए कुछ ऐसा ले जाया जा रहा है जो उसकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। जब बेड़ा गाजा के प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र के करीब पहुंचा, तो कमांडो ने धावा बोल दिया।
क्या ये वाकई सिर्फ मानवीय मदद थी
अक्सर ऐसे बेड़ों को 'फ्रीडम फ्लोटिला' का नाम दिया जाता है। दाावा ये होता है कि इनमें दवाइयां, खाना और निर्माण सामग्री है। लेकिन इजरायल का नजरिया अलग है। इतिहास गवाह है कि अतीत में ऐसे ही जहाजों से हथियारों की तस्करी की कोशिशें हुई हैं। साल 2010 का 'मावी मरमरा' कांड किसे याद नहीं है? तब भी स्थिति ऐसी ही थी और नतीजा काफी हिंसक रहा था।
इस बार इजरायली नौसेना ने अधिक सावधानी बरती। उन्होंने जहाजों को घेर लिया और चेतावनी दी। जब जहाजों ने रास्ता बदलने से इनकार कर दिया, तो स्पेशल फोर्सेस ने बोर्डिंग ऑपरेशन शुरू किया। 50 जहाजों का बेड़ा एक छोटा नंबर नहीं है। इतने बड़े बेड़े को मैनेज करना और बिना किसी बड़े खून-खराबे के रोकना एक बड़ी चुनौती थी।
गिरफ्तार किए गए दो विदेशी नागरिक कौन हैं? अभी तक उनकी पहचान पूरी तरह उजागर नहीं की गई है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि वे यूरोपीय देशों के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। वे जहाज के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। इजरायल उन पर 'दुश्मन की मदद' और 'प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध प्रवेश' के आरोप लगा सकता है।
इजरायल की सुरक्षा रणनीति और समुद्री घेराबंदी
गाजा की समुद्री घेराबंदी को लेकर दुनिया दो गुटों में बंटी हुई है। संयुक्त राष्ट्र और कई मानवाधिकार संगठन इसे अवैध मानते हैं। उनका कहना है कि ये गाजा के आम लोगों के लिए सजा जैसा है। दूसरी तरफ, इजरायल इसे अपनी रक्षा के लिए जरूरी मानता है। उनका तर्क सरल है—अगर समंदर का रास्ता खुला छोड़ दिया गया, तो ईरान जैसे देश हमास तक भारी हथियार पहुंचा देंगे।
इजरायली नौसेना की 'फ्लोटिला 13' यूनिट ऐसी स्थितियों के लिए ही बनी है। ये दुनिया के सबसे खतरनाक कमांडो यूनिट्स में से एक है। इस ऑपरेशन में इनकी भूमिका सबसे अहम थी। उन्होंने रात के अंधेरे में जहाजों पर कब्जा किया। तकनीक का इस्तेमाल इतना सटीक था कि बड़े जहाजों के इंजन बीच समंदर में ही जाम कर दिए गए।
इजरायल ने बार-बार कहा है कि अगर कोई सहायता भेजना चाहता है, तो वो अशदोद बंदरगाह का इस्तेमाल करे। वहां सामान की जांच होगी और फिर उसे सड़क मार्ग से गाजा भेजा जाएगा। लेकिन प्रदर्शनकारी सीधे गाजा पहुंचना चाहते हैं। ये जिद ही टकराव की असली वजह बनती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक उलझनें
इस एक्शन के बाद तुर्की, कतर और कई यूरोपीय देशों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। दो विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने इस आग में घी डालने का काम किया है। उन देशों की सरकारें अब इजरायल पर दबाव बना रही हैं कि उनके नागरिकों को तुरंत रिहा किया जाए।
पर इजरायल झुकने के मूड में नहीं दिखता। बेन्यामिन नेतन्याहू की सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का कहना है कि समंदर में इस तरह की कार्रवाई 'सैन्य नाकेबंदी' के नियमों के तहत आती है। अगर कोई देश घोषित कर दे कि एक निश्चित इलाका ब्लॉक है, तो वो वहां आने वाले किसी भी जहाज को रोकने का हक रखता है।
इजरायल के इस एक्शन ने ये भी दिखाया है कि उसके पास खुफिया जानकारी का लेवल क्या है। 50 जहाजों के मूवमेंट को ट्रैक करना और सही समय पर हमला बोलना मामूली बात नहीं है। इसमें सैटेलाइट इमेजरी और अंडरवाटर सेंसर्स का बड़ा हाथ रहा होगा।
प्रोपेगेंडा की लड़ाई और जमीनी सच्चाई
ये लड़ाई सिर्फ जहाजों और बंदूकों की नहीं है। ये कैमरों और सोशल मीडिया की भी है। जहाजों पर सवार लोग लगातार लाइव स्ट्रीमिंग कर रहे थे। वे खुद को पीड़ित और इजरायल को हमलावर दिखा रहे थे। वहीं इजरायल की तरफ से जारी फुटेज में दिखाया गया कि कैसे चेतावनी के बावजूद बेड़ा आगे बढ़ रहा था।
सच्चाई अक्सर इन दो छोरों के बीच कहीं दबी होती है। गाजा में मानवीय संकट गहरा है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन क्या ये बेड़ा उस संकट को हल करने के लिए था या सिर्फ इजरायल को उकसाने के लिए? जब आप 50 जहाज लेकर निकलते हैं, तो आप जानते हैं कि टकराव होगा ही। ये एक सोचा-समझा पॉलिटिकल स्टंट भी हो सकता है।
गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ जारी है। इजरायली सुरक्षा एजेंसियां ये पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे मिशन की फंडिंग कहां से हुई। क्या इसके पीछे किसी देश की सरकार का हाथ था या ये सिर्फ कुछ एक्टिविस्ट्स का ग्रुप था?
इजरायल ने अब तटीय सुरक्षा को और कड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में भूमध्य सागर में और भी पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी। अगर आप इस क्षेत्र में यात्रा कर रहे हैं या समुद्री व्यापार से जुड़े हैं, तो ये जान लीजिए कि इजरायल ने अपने 'रेड लाइन्स' को और भी गहरा खींच दिया है। किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि अब सीधे और कड़े एक्शन को न्योता देगी।
अगला कदम अब इन दो विदेशी नागरिकों के देशों की सरकारों का होगा। वे या तो इजरायल से कानूनी लड़ाई लड़ेंगे या परदे के पीछे से समझौते की कोशिश करेंगे। पर एक बात तय है, समंदर में इजरायल की इस धमक ने गाजा के मुद्दे को एक बार फिर ग्लोबल हेडलाइन्स में ला खड़ा किया है। इजरायल ने दिखा दिया है कि संख्या चाहे 5 हो या 50, उसकी नौसेना किसी को भी पार नहीं करने देगी।